हिन्दी दैनिक समाचार पत्र में दिनांक-07.03.2025 को प्रकाशित ‘मिलावट की छुट, बीमारियों को न्योता’ शीर्षक ध्यान में रखते हुए क्या मंत्री, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, यह बतलाने की कृपा करेंगे कि-1. क्या यह बात सही है कि राज्य में विभाग की उदासिनता एवं खाद्य संरक्षण पदाधिकारियों की कमी के कारण दूध में फार्मेलिन एवं खाद्य सामग्रियों में मिलावट के दुष्प्रभाव से आमजन कैंसर, हृदय रोग, याददाश्त व मानसिक विकार, लिवर, किडनी, चर्म एवं पेट रोग जैसे गंभीर बिमारी के शिकार हो रहे हैं, जबकि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अनुसार दूषित मिलावटी खाद्य सामग्री के उत्पादाकों, वितरकों एवं विक्रेताओं पर 10 लाख जुर्माना एवं छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है, यदि हाँ, तो सरकार मिलावट करनेवाले एवं इसकी जांच में शिथिलता बरतने वाले पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ इसकी रोकथाम की सामुचित व्यवस्था करवाने का विचार रखती है, नही तो क्यों?