क्या मंत्री, गृह विभाग, यह बतलाने की कृपा करेंगे कि :-1. क्या यह बात सही है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 307 अब नई धारा बीएनएस 109 हो गया है, मेडिकल रिपोर्ट आये बिना थानाध्यक्षों द्वारा अधिकांश मामले में इस धारा को FIR में लगा दिया जाता है, जिस कारण Accused Person को मानसिक तनाव के साथ आर्थिक दबाव को भी सहन करना पड़ता है;2. यदि हाँ तो क्या सरकार मानवीय दृष्टिकोण से धारा 307 की समीक्षा कर अक्सर FIR में हो रहे इस धारा का दुरूपयोग को रोकने और थानाध्यक्षों को सही जाँच परख के बाद इसका प्रयोग करने का विचार रखती है, हाँ, तो कबतक, नहीं तो क्यों ?