क्या मंत्री, पथ निर्माण विभाग, यह बतलाने की कृपा करेंगें कि- क्या यह बात सही है कि भागलपुर जिलान्तर्गत सावन एवं भादो मास में लाखों श्रद्धालु कहलगांव स्थित उतरवाहिनी गंगा से जल भरकर घोघा और बौसी (बांका) के रास्ते बासुकीनाथ धाम (झारखंड) की कठिन पैदल यात्रा करते है, जबकि सुल्तानगंज-देवघर पथ की तरह कहलगांव से बासुकीनाथ जाने वाले इस मार्ग पर कांवरियों के लिए समर्पित ‘कावरिया पथ (soft path/Footpath) और बुनियादी सुविधाओं (विश्राम गृह, पेयजल, प्रकाश) का अभाव है, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाई होती है और दुर्घटनाओं का भय बना रहता है; यदि हाँ तो सरकार उतरवाहिनी गंगा के धार्मिक महत्व को देखते हुए कहलगांव-घोघा-बौसी मार्ग को ‘कावरिया सर्किट’ के रूप में विकसित करने और कांवरियों के चलने के लिए सड़क के किनारे एक समर्पित पथ का निर्माण कब तक करने का विचार रखती है, नहीं, तो क्यों ?